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पुनर्गठन नीति 2.0

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पुनर्गठन नीति 2.0

कोविड-19 से संबंधित वित्तीय तनाव हेतु समाधान रूपरेखा (Resolution Framework) 2.0

 

1. अवलोकन

 

हाल के सप्ताहों में भारत में कोविड-19 महामारी के पुनः बढ़ते प्रकोप तथा इसके प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए नियंत्रणात्मक उपाय (Containment Measures) आर्थिक पुनर्प्राप्ति (Recovery Process) को प्रभावित कर सकते हैं तथा नई अनिश्चितताएँ उत्पन्न कर सकते हैं। व्यक्तिगत उधारकर्ताओं (Individual Borrowers) तथा छोटे व्यवसायों (Small Businesses) पर संभावित वित्तीय तनाव को कम करने के उद्देश्य से, भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) ने 5 मार्च 2021 को "Resolution Framework – 2.0: Resolution of Covid-19 related stress of Individuals, Small Businesses and MSMEs" शीर्षक से एक अधिसूचना जारी की, जो हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (Housing Finance Companies - HFCs) पर लागू होती है। उक्त अधिसूचना के अंतर्गत, अन्य बातों के साथ, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) को कोविड-19 की दूसरी लहर के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव से निपटने, आर्थिक पुनरुद्धार (Revival) को प्रोत्साहित करने तथा व्यवहार्य व्यवसायों (Viable Businesses) की निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समाधान रूपरेखा (Resolution Framework) प्रदान करने की अनुमति दी गई।

 

शुभम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (SHDFCL) ने उपर्युक्त RBI दिशा-निर्देशों में वर्णित सिद्धांतों के आधार पर कोविड-19 से संबंधित वित्तीय तनाव के समाधान हेतु Resolution Framework–2.0 ("नीति") तैयार की है। यह नीति उन लोन खातों (Loan Accounts) पर लागू होगी जिनमें कोविड-19 से संबंधित वित्तीय तनाव के कारण लोन चुकाने की क्षमता (Repayment Capability) अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है।

 

2. स्वामित्व संबंधी सूचना (Proprietary Information)

 

इस दस्तावेज़ में निहित समस्त सामग्री SHDFCL की स्वामित्व (Proprietary) संपत्ति है। SHDFCL की पूर्व लिखित अनुमति के बिना इस सामग्री के किसी भी भाग का किसी भी रूप में, किसी भी माध्यम से—चाहे इलेक्ट्रॉनिक हो या यांत्रिक, जिसमें फोटोकॉपी या किसी सूचना भंडारण (Information Storage) अथवा पुनर्प्राप्ति (Retrieval) प्रणाली का उपयोग भी शामिल है—पुनरुत्पादन (Reproduction) या प्रकाशन (Publication) नहीं किया जाएगा।

 

I. आवास लोन (Housing Loans) एवं संपत्ति के विरुद्ध लोन (Loan Against Property - LAP) हेतु समाधान रूपरेखा (Resolution Framework)

 

पैरामीटरमानदंड
पात्र लोन (Eligible Loans)
  • 31 मार्च 2021 की स्थिति में जो लोन खाते स्टैंडर्ड (Standard) श्रेणी में थे, वे पात्र होंगे।
  • उधारकर्ता (Borrower) का नकदी प्रवाह (Cash Flow) अथवा आय (Income) कोविड-19 महामारी के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई होनी चाहिए।

प्रयोज्यता (Applicability)

  • ऐसे व्यक्तिगत उधारकर्ता (Individuals) जिन्होंने व्यक्तिगत लोन (Personal Loans) प्राप्त किए हैं, जैसा कि 04 जनवरी 2018 के परिपत्र DBR.No.BP.BC.99/08.13.100/2017-18 "XBRL Returns – Harmonization of Banking Statistics" में परिभाषित किया गया है।
  • ऐसे व्यक्तिगत उधारकर्ता जिन्होंने व्यावसायिक उद्देश्यों (Business Purposes) के लिए लोन या अग्रिम (Loans and Advances) प्राप्त किए हैं तथा 31 मार्च 2021 तक जिनके प्रति सभी लोनदात्री संस्थानों (Lending Institutions) का कुल एक्सपोज़र (Aggregate Exposure) ₹25 करोड़ से अधिक नहीं है।
  • ऐसे लघु व्यवसाय (Small Businesses), जिनमें खुदरा (Retail) एवं थोक (Wholesale) व्यापार से जुड़े व्यवसाय भी शामिल हैं, लेकिन जो 31 मार्च 2021 तक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के रूप में वर्गीकृत नहीं थे तथा जिनके प्रति सभी लोनदात्री संस्थानों का कुल एक्सपोज़र 31 मार्च 2021 तक ₹25 करोड़ से अधिक नहीं है।

अपात्र लोन (Ineligible Loans)

- SHDFCL के कर्मचारियों को दिए गए लोन। - वित्तीय सेवा प्रदाताओं (Financial Service Providers) को दिए गए लोन। - इस उद्देश्य के लिए समझौता निपटान (Compromise Settlement) को समाधान योजना (Resolution Plan) के रूप में अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि दी जाने वाली राहत (Relaxation) का लाभ केवल उन उधारकर्ताओं को मिलना चाहिए जिनका व्यवसाय मूलतः सुदृढ़ (Sound Business) है तथा जिनमें लोन चुकाने की क्षमता (Repayment Capability) है, लेकिन जो महामारी के कारण उत्पन्न व्यापक व्यवधान (Widespread Disruption) के चलते अपने वित्तीय दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं।

पात्र उत्पाद (Eligible Products)आवास लोन (Home Loans) संपत्ति के विरुद्ध लोन (Loan Against Property - LAP)
समाधान योजनाएँ (Resolution Plans)

i. समाधान योजनाओं (Resolution Plans) में अन्य बातों के साथ निम्नलिखित उपाय शामिल हो सकते हैं:

- भुगतान अनुसूची (Payment Schedule) का पुनर्निर्धारण (Rescheduling)। - अर्जित (Accrued) अथवा भविष्य में अर्जित होने वाले ब्याज को किसी अन्य लोन सुविधा (Credit Facility) में परिवर्तित करना। - अधिस्थगन अवधि (Moratorium) प्रदान करना।

उपरोक्त सभी उपाय उधारकर्ता (Borrower) की आय के स्रोतों (Income Streams) के मूल्यांकन के आधार पर किए जाएंगे।

ii. यदि अधिस्थगन अवधि (Moratorium) प्रदान की जाती है, तो उसकी अधिकतम अवधि दो वर्ष होगी तथा वह समाधान योजना (Resolution Plan) के कार्यान्वयन (Implementation) के साथ ही प्रभावी हो जाएगी। उधारकर्ताओं को लोन सुविधा (Loan Facility) की शेष अवधि (Residual Tenor) बढ़ाने की अनुमति भी दी जा सकती है, चाहे भुगतान अधिस्थगन (Payment Moratorium) प्रदान किया गया हो या नहीं। अधिस्थगन अवधि सहित, यदि लागू हो, शेष अवधि के विस्तार की कुल अधिकतम सीमा दो वर्ष होगी। iii. जिन उधारकर्ताओं के लिए समाधान प्रक्रिया (Resolution Process) प्रारंभ की जा चुकी है, उनके लिए SHDFCL को समाधान योजना के कार्यान्वयन से पूर्व भी उधारकर्ता की अंतरिम तरलता (Interim Liquidity) संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु अतिरिक्त वित्त (Additional Finance) स्वीकृत करने की अनुमति होगी। iv. समाधान योजना के कार्यान्वयन तक इस अतिरिक्त वित्त (Additional Finance) को "स्टैंडर्ड (Standard)" श्रेणी में वर्गीकृत किया जा सकता है। तथापि, यदि समाधान योजना निर्धारित समय-सीमा (Stipulated Timelines) के भीतर लागू नहीं की जाती है, तो स्वीकृत अतिरिक्त वित्त की परिसंपत्ति वर्गीकरण (Asset Classification) उधारकर्ता के उस अतिरिक्त वित्त के संबंध में वास्तविक प्रदर्शन (Actual Performance) अथवा उसकी अन्य लोन सुविधाओं (Credit Facilities) के प्रदर्शन, जो भी अधिक प्रतिकूल (Worse) हो, के आधार पर किया जाएगा।

समाधान रूपरेखा (Resolution Framework) का कार्यान्वयन – पात्र खातों पर लागू

समाधान रूपरेखा के लिए निम्नलिखित प्रावधान लागू होंगे:

1. समाधान प्रक्रिया (Resolution Process) 30 सितंबर 2021 तक या उससे पहले प्रारंभ (Invoke) की जानी चाहिए तथा प्रारंभ किए जाने की तिथि से 90 दिनों के भीतर इसका कार्यान्वयन (Implementation) किया जाना अनिवार्य होगा।

2. समाधान प्रक्रिया प्रारंभ होने की तिथि (Date of Invocation) वही मानी जाएगी, जिस दिन SHDFCL और उधारकर्ता (Borrower) समाधान योजना (Resolution Plan) को आगे बढ़ाने पर सहमत होंगे।

(क) परस्पर सहमत समाधान योजना (Resolution Plan) के लिए उधारकर्ता की लिखित सहमति (Written Consent) प्राप्त की जाएगी।

(ख) समाधान योजना को तभी कार्यान्वित (Implemented) माना जाएगा जब Resolution Framework – 1.0 के परिशिष्ट (Annex) के अनुच्छेद 10 में वर्णित सभी शर्तें पूर्ण कर ली जाएँ।

संग्रह किए जाने वाले दस्तावेज़

- ग्राहक की स्वीकृति सहित संशोधित स्वीकृति पत्र (Revised Sanction Letter) / संशोधित अनुबंध (Agreement)। - अद्यतन KYC दस्तावेज़। - क्रेडिट पीडी (Credit PD)। - उधारकर्ता का आवेदन पत्र तथा घोषणा-पत्र (Undertaking), जिसमें यह उल्लेख हो कि कोविड-19 महामारी के कारण उसकी आय (Income) अथवा नकदी प्रवाह (Cash Flow) में कमी या हानि हुई है और वह वित्तीय रूप से प्रभावित हुआ/हुई है।

वेतनभोगी (Salaried) – सर्वोत्तम प्रयास (Best Effort Basis) के आधार पर

  • जनवरी 2020 से अद्यतन वेतन पर्चियाँ (Salary Slips) अथवा नकद वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के मामले में उधारकर्ता की घोषणा (Borrower Declaration)।
  • उस बैंक खाते का जनवरी 2020 से अद्यतन बैंक विवरण (Bank Account Statement), जिसमें वेतन जमा किया जाता है।
  • नौकरी छूटने की स्थिति में पूर्व नियोक्ता (Previous Employer) द्वारा जारी रोजगार समाप्ति (Loss of Job) का प्रमाण।
  • उधारकर्ता द्वारा वर्तमान बेरोज़गारी (Current Unemployment) एवं पूर्व आय स्तर (Previous Income Levels) का घोषणा-पत्र।

स्व-रोज़गार (Self Employed) – सर्वोत्तम प्रयास (Best Effort Basis) के आधार पर

  • पिछले 12 महीनों के बैंक खाता विवरण (Bank Account Statements)।
  • वित्तीय वर्ष 2020 एवं वित्तीय वर्ष 2021 की प्रथम छमाही (H1) के GST रिटर्न, तथा पिछले दो वर्षों का लाभ एवं हानि विवरण (Profit & Loss Statement) / बैलेंस शीट (Balance Sheet), यदि लागू हो।
  • उद्यम पंजीकरण प्रमाणपत्र (Udyam Certificate), यदि उपलब्ध हो।
  • उधारकर्ता द्वारा वर्तमान आय स्तर (Current Income Levels) एवं पूर्व आय स्तर (Previous Income Levels) का घोषणा-पत्र।
परिसंपत्ति वर्गीकरण (Asset Classification)

1. स्वीकृत समाधान योजना (Resolution Plan) के कार्यान्वयन के पश्चात ऐसे खातों का परिसंपत्ति वर्गीकरण (Asset Classification) "स्टैंडर्ड (Standard)" बना रहेगा।

2. जो खाते समाधान प्रक्रिया प्रारंभ (Invocation) होने और योजना के कार्यान्वयन (Implementation) के बीच एनपीए (NPA - Non-Performing Asset) बन गए हों, उन्हें भी योजना के कार्यान्वयन की तिथि से पुनः "स्टैंडर्ड (Standard)" श्रेणी में उन्नत (Upgrade) कर दिया जाएगा।

3. जिन उधारकर्ताओं के लिए समाधान योजना प्रारंभ की जा चुकी है, उनके लिए अंतरिम तरलता (Interim Liquidity) की आवश्यकता पूरी करने हेतु योजना के कार्यान्वयन से पहले स्वीकृत अतिरिक्त वित्त (Additional Finance) को, योजना लागू होने तक, उधारकर्ता के उस अवधि के वास्तविक प्रदर्शन की परवाह किए बिना "स्टैंडर्ड परिसंपत्ति (Standard Asset)" के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

4. योजना के कार्यान्वयन के बाद परिसंपत्ति वर्गीकरण (Asset Classification) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के उस समय लागू परिसंपत्ति वर्गीकरण संबंधी मानदंडों के अनुसार किया जाएगा।

पूर्व में पुनर्गठित लोनों के लिए मानदंडों का समन्वय (Convergence of Norms)जिन उधारकर्ताओं के लोनों के लिए Resolution Framework – 1.0 के अंतर्गत समाधान योजनाएँ लागू की जा चुकी थीं तथा जिनमें या तो कोई अधिस्थगन (Moratorium) प्रदान नहीं किया गया था, या दो वर्ष से कम अवधि का अधिस्थगन दिया गया था, अथवा लोन की शेष अवधि (Residual Tenor) में दो वर्ष से कम का विस्तार किया गया था, ऐसे मामलों में SHDFCL को इस रूपरेखा के अंतर्गत केवल अधिस्थगन अवधि या शेष अवधि के विस्तार को बढ़ाने के उद्देश्य से उन योजनाओं में संशोधन करने की अनुमति होगी। यह संशोधन Resolution Plan (ii) में निर्दिष्ट अधिकतम सीमा के अधीन होगा तथा इसके लिए लोन की शर्तों में आवश्यक परिवर्तन किए जा सकते हैं। Resolution Framework – 1.0 तथा वर्तमान रूपरेखा के अंतर्गत प्रदान किए गए अधिस्थगन और/या शेष अवधि के विस्तार की संयुक्त अधिकतम सीमा दो वर्ष होगी।
समाधान समिति (Resolution Committee)सभी पुनर्गठित (Restructuring) खातों को एक समाधान समिति (Resolution Committee) द्वारा अनुमोदित किया जाएगा, जिसमें मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer - COO), मुख्य व्यवसाय अधिकारी (Chief Business Officer - CBO), क्रेडिट एवं सेवा प्रमुख (Head – Credit and Service) तथा क्रेडिट नीति एवं जोखिम नियंत्रण प्रमुख (Head – Credit Policy and Risk Control) शामिल होंगे।
क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्टिंग (Reporting to Bureau)इस विंडो के भाग A (Part A) के अंतर्गत जिन उधारकर्ताओं के लिए समाधान योजना लागू की जाती है, उनके संबंध में SHDFCL द्वारा क्रेडिट सूचना कंपनियों (Credit Information Companies) को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में खाते की स्थिति "COVID-19 के कारण पुनर्गठित (Restructured due to COVID-19)" के रूप में दर्शाई जाएगी। इसके परिणामस्वरूप, ऐसे उधारकर्ताओं का क्रेडिट इतिहास (Credit History) पुनर्गठित खातों पर लागू संबंधित क्रेडिट सूचना कंपनियों की नीतियों के अनुसार संचालित होगा।
प्रावधान (Provisioning)

SHDFCL समाधान योजना के कार्यान्वयन (Implementation) की तिथि से ऐसा प्रावधान (Provision) बनाए रखेगा, जो कार्यान्वयन से ठीक पूर्व लागू IRAC मानदंडों के अनुसार आवश्यक प्रावधान अथवा कार्यान्वयन के बाद पुनः वार्ता (Renegotiated) के पश्चात शेष लोन देयता (Residual Debt Exposure) के 10%, इनमें से जो अधिक हो, उसके बराबर होगा। यदि समाधान योजना के कार्यान्वयन के बाद उधारकर्ता एनपीए (NPA) बने बिना शेष लोन (Residual Debt) का कम से कम 20% चुका देता है, तो उपर्युक्त प्रावधान का 50% वापस (Written Back) किया जा सकता है। शेष 50% तब वापस किया जा सकता है जब उधारकर्ता बिना एनपीए बने शेष लोन का अतिरिक्त 10% भी चुका दे।

इस व्यवस्था (Window) के अंतर्गत बनाए जाने वाले प्रावधान, जिन्हें पहले से वापस (Reverse) नहीं किया गया है, ऐसे मामलों में उपयोग किए जा सकेंगे जहाँ समाधान योजना लागू किए जाने के बाद कोई खाता बाद में एनपीए (NPA) के रूप में वर्गीकृत हो जाए।

इस सुविधा के अंतर्गत समाधान योजना लागू होने के पश्चात, आगे का परिसंपत्ति वर्गीकरण (Asset Classification) 1 जुलाई 2015 की मास्टर परिपत्र – प्रूडेंशियल नॉर्म्स (Master Circular – Prudential Norms) अथवा SHDFCL पर लागू अन्य प्रासंगिक निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

सभी मामलों में आगे का उन्नयन (Upgradation) केवल Prudential Framework अथवा अन्य लागू निर्देशों के अंतर्गत नए पुनर्गठन (Fresh Restructuring) के कार्यान्वयन के अधीन होगा। यदि निगरानी अवधि (Monitoring Period) के दौरान खाता एनपीए (NPA) के रूप में वर्गीकृत नहीं होता है, तो परिसंपत्ति वर्गीकरण के मानदंड पुनः मास्टर परिपत्र – प्रूडेंशियल नॉर्म्स (Master Circular – Prudential Norms) अथवा अन्य लागू निर्देशों के अनुसार लागू होंगे।

इस व्यवस्था (Window) के अंतर्गत बनाए जाने वाले प्रावधान, जिन्हें पहले से वापस नहीं किया गया है, निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए उपलब्ध रहेंगे: (i) ऐसे मामलों में आवश्यक प्रावधान, जहाँ समाधान योजना लागू होने के बाद कोई खाता बाद में एनपीए (NPA) के रूप में वर्गीकृत हो जाए; तथा (ii) Prudential Framework में निर्दिष्ट अतिरिक्त प्रावधान (Additional Provisioning Requirements)।

अन्य मानदंड (Other Norms)अन्य सभी नीतिगत मानकों (Policy Parameters) के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की 5 मई 2021 दिनांकित अधिसूचना "Resolution Framework – 2.0: Resolution of Covid-19 related stress of Individuals and Small Businesses" तथा उससे संबंधित FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) का संदर्भ लिया जाएगा।

II. एमएसएमई (MSME) खातों के लिए समाधान रूपरेखा (व्यावसायिक उद्देश्य हेतु LAP)

पैरामीटरमानदंड (एमएसएमई लोनों के लिए)
पात्र लोन एवं लागू दिशा-निर्देश
  • केवल व्यावसायिक उद्देश्य हेतु संपत्ति के विरुद्ध लोन (Loan Against Property - LAP) वाले एमएसएमई (MSME) खातों पर लागू।
  • 31 मार्च 2021 की स्थिति में संबंधित खाता "स्टैंडर्ड परिसंपत्ति (Standard Asset)" होना चाहिए।
  • 31 मार्च 2021 तक बैंकों एवं एनबीएफसी (NBFCs) का उधारकर्ता के प्रति कुल एक्सपोज़र (Aggregate Exposure) ₹25 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • उधारकर्ता का खाता पूर्व में पुनर्गठित (Restructured) नहीं किया गया होना चाहिए।
  • उधारकर्ता के खाते का पुनर्गठन (Restructuring) 30 सितंबर 2021 तक प्रारंभ (Invoke) किया जाना चाहिए तथा प्रारंभ होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर लागू (Implement) किया जाना अनिवार्य होगा।
  • पुनर्गठन प्रक्रिया को उस तिथि से प्रारंभ (Invoked) माना जाएगा, जिस दिन SHDFCL और उधारकर्ता संबंधित खाते के लिए पुनर्गठन योजना (Restructuring Plan) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमत हो जाते हैं।
  • पुनर्गठन योजना के कार्यान्वयन की तिथि पर उधार लेने वाली संस्था (Borrowing Entity) का GST के अंतर्गत पंजीकृत (GST Registered) होना आवश्यक होगा। हालांकि, यह शर्त उन एमएसएमई (MSMEs) पर लागू नहीं होगी जिन्हें GST पंजीकरण से छूट प्राप्त है। यह छूट 31 मार्च 2021 को लागू छूट सीमा (Exemption Limit) के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
  • यदि उधारकर्ता उद्यम पंजीकरण (Udyam Registration) पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है, तो पुनर्गठन योजना के कार्यान्वयन से पूर्व उसका पंजीकरण पूर्ण किया जाना आवश्यक होगा, तभी योजना को लागू (Implemented) माना जाएगा।
  • पुनर्गठन प्रक्रिया प्रारंभ करने हेतु उधारकर्ताओं से प्राप्त आवेदनों पर SHDFCL द्वारा लिया गया निर्णय आवेदन प्राप्त होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर लिखित रूप में उधारकर्ता को सूचित किया जाएगा।
  • इस सुविधा के अंतर्गत पुनर्गठन प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय
  • पुनर्गठन योजना के अंतर्गत, जो खाते पहले से स्टैंडर्ड (Standard) श्रेणी में हैं, उनका वर्गीकरण यथावत रखा जाएगा। वहीं, जो खाते 1 अप्रैल 2021 से लेकर पुनर्गठन योजना के कार्यान्वयन की तिथि के बीच एनपीए (NPA) श्रेणी में चले गए हों, उन्हें योजना लागू होने की तिथि से पुनः "स्टैंडर्ड परिसंपत्ति (Standard Asset)" के रूप में उन्नत (Upgrade) किया जा सकता है।
  • पुनर्गठन योजना लागू होने के पश्चात SHDFCL उधारकर्ता के शेष लोन (Residual Debt) का 10% प्रावधान (Provision) बनाए रखेगा।
  • सभी पुनर्गठन (Restructuring) खातों को एक समाधान समिति (Resolution Committee) द्वारा अनुमोदित किया जाएगा, जिसमें मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer - COO), मुख्य व्यवसाय अधिकारी (Chief Business Officer - CBO), क्रेडिट एवं सेवा प्रमुख (Head – Credit and Service) तथा क्रेडिट नीति एवं जोखिम नियंत्रण प्रमुख (Head – Credit Policy and Risk Control) शामिल होंगे।
  • 6 अगस्त 2020 के परिपत्र संख्या DOR.No.BP.BC/4/21.04.048/2020-21 में निर्दिष्ट अन्य सभी निर्देश यथावत लागू रहेंगे।
  • अन्य सभी नीतिगत प्रावधानों (Policy Parameters) के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की 5 मई 2021 दिनांकित अधिसूचना "Resolution 2.0 of Covid-19 related stress of Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) sector – Restructuring of Advances" का संदर्भ लिया जाएगा।

 

अंतिम अद्यतन: 18.05.2021